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सांसद बृजमोहन ने लोकसभा में उठाया न्यायालय ई-सेवा केंद्रों का मुद्दा

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OM Darpan

Aug 10, 2024 02:35 pm 234 views
सांसद बृजमोहन ने लोकसभा में उठाया न्यायालय ई-सेवा केंद्रों का मुद्दा
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सुदूर इलाकों के रहवासियों के लिए न्यायिक सेवाओं की सुलभता और पारदर्शिता की मांग, विधि और न्याय मंत्री ने दी विस्तृत जानकारी

  रायपुर। छत्तीसगढ़ के सुदूर और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को न्यायिक सेवाओं तक पहुंचने में हो रही कठिनाइयों को देखते हुए, रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने शुक्रवार को लोकसभा में इस गंभीर मुद्दे को उठाया। उन्होंने न्यायालय ई-सेवा केंद्रों की सुलभता और पारदर्शिता को लेकर विशेष ध्यान देने की मांग की। सांसद अग्रवाल ने विधि और न्याय मंत्री से जानकारी मांगी कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ सहित देशभर में कितने ई-सेवा केंद्र संचालित हो रहे हैं और वहां उपलब्ध सेवाओं का विवरण क्या है। उन्होंने जोर दिया कि सुदूर क्षेत्रों के निवासियों को भी अन्य नागरिकों की तरह न्याय तक समान रूप से पहुंच मिलनी चाहिए, और इसके लिए ई-सेवा केंद्रों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
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इस पर विधि और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संसद में जानकारी दी कि भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय को पायलट परियोजना के तहत 2 ई-सेवा केंद्र स्थापित करने के लिए 10.68 लाख रुपये जारी किए थे। इसके अतिरिक्त, ई-न्यायालय मिशन मोड परियोजना के तीसरे चरण के अंतर्गत, छत्तीसगढ़ राज्य को 4.44 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है, जिससे राज्य में 23 जिला न्यायालयों में और 1 उच्च न्यायालय में ई-सेवा केंद्र स्थापित किए गए हैं। मंत्री मेघवाल ने आगे बताया कि देशभर में इस समय 1,072 ई-सेवा केंद्र कार्यरत हैं। इन केंद्रों का उद्देश्य वाद स्थिति, सुनवाई की अगली तारीख और अन्य विवरणों के बारे में पूछताछ का निपटारा करना, प्रमाणित प्रतियों के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा प्रदान करना, याचिकाओं की ई-फाइलिंग में मदद करना और ई-स्टाम्प पेपर/ई-भुगतान जैसी सेवाओं को सुलभ बनाना है। ये केंद्र विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी हैं, जो प्रौद्योगिकी तक पहुंच नहीं रखते या जो सुदूर इलाकों में रहते हैं। ई-सेवा केंद्रों के माध्यम से सुदूर इलाकों के रहवासियों को सुलभ न्यायिक सेवाओं का लाभ प्राप्त होगा, जिससे न केवल न्याय तक पहुंच की प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि न्यायालयीन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जा सकेगी। सांसद अग्रवाल ने उम्मीद जताई कि सरकार इस दिशा में और कदम उठाएगी ताकि न्यायालय ई-सेवा केंद्रों की संख्या और सेवाओं में वृद्धि हो, जिससे ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों के लोग न्यायिक प्रणाली से भली-भांति जुड़ सकें।  
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