22 अक्टूबर 2026 |
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मिशन 'वीबी-जी राम जी' पर संग्राम : भाजपा शासित राज्यों ने भी जताया विरोध, कांग्रेस बोली- बिना चर्चा मनरेगा खत्म करना तानाशाही

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OM Darpan

Jun 28, 2026 09:00 pm 597 views
मिशन 'वीबी-जी राम जी' पर संग्राम : भाजपा शासित राज्यों ने भी जताया विरोध, कांग्रेस बोली- बिना चर्चा मनरेगा खत्म करना तानाशाही
वीबी-जी राम जी योजना पर कांग्रेस का विरोध और मनरेगा विवाद

  • राज्यों पर बढ़ेगा अतिरिक्त वित्तीय बोझ

  • ग्रामीण मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने की मांग

  नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के स्थान पर लाई गई नई योजना विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण यानी वीबी-जी राम जी को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस ने दावा किया है कि इस योजना पर न केवल विपक्षी बल्कि मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड जैसे भाजपा शासित राज्यों ने भी गंभीर वित्तीय आपत्तियां दर्ज कराई हैं। कांग्रेस के अनुसार, राज्यों को डर है कि नई व्यवस्था से उनके खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
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राज्यों के खजाने पर पड़ेगा भारी बोझ

कांग्रेस महासचिव संचार जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि नई व्यवस्था के तहत राज्यों पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ को लेकर चिंता जताई जा रही है। उन्होंने बताया कि कई राज्यों को आशंका है कि योजना के संचालन और वित्तपोषण में राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ने से उनके बजट पर भारी दबाव पड़ेगा। गौरतलब है कि ग्रामीण विकास मंत्री के गृह राज्य की ओर से भी इस नई योजना के मौजूदा स्वरूप को लेकर चिंता व्यक्त की गई है, जो केंद्र के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है।

ब्लैकआउट अवधि और मजदूरी पर तकरार

कांग्रेस महासचिव के अनुसार, चार राज्यों ने खेती के चरम मौसम के दौरान प्रस्तावित 'ब्लैकआउट अवधि' का कड़ा विरोध किया है। इस अवधि में रोजगार उपलब्ध न होने से ग्रामीण श्रमिकों और किसानों के सामने रोजी-रोटी का गहरा संकट खड़ा हो सकता है। इसके अलावा, कम से कम पांच राज्यों ने बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत के मद्देनजर ग्रामीण श्रमिकों की मजदूरी में सम्मानजनक बढ़ोतरी की मांग की है। राज्यों का तर्क है कि बिना मजदूरी बढ़ाए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देना संभव नहीं होगा।
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बिना परामर्श कानून थोपने का गंभीर आरोप

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने ग्रामीण विकास संबंधी संसदीय स्थायी समिति, राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों से पर्याप्त परामर्श किए बिना ही मनरेगा को समाप्त करने संबंधी विधेयक संसद से पारित करा दिया। उन्होंने इसे प्रतिशोध और राजनीतिक द्वेष से प्रेरित कदम करार दिया। कांग्रेस का कहना है कि 1 जुलाई से लागू हो रही इस नई योजना से निर्णय प्रक्रिया का पूरी तरह केंद्रीकरण हो जाएगा, जो संघीय ढांचे के खिलाफ है। ग्रामीण रोजगार जैसे संवेदनशील विषय पर राज्यों के साथ सहमति बनाना अनिवार्य था, जिसे केंद्र ने पूरी तरह दरकिनार कर दिया है।
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