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मोमबत्ती और दीयों से जगमग होगा शहर, महिलाओं ने कमाए 20 हजार रूपए

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OM Darpan

Oct 24, 2024 08:05 am 271 views
मोमबत्ती और दीयों से जगमग होगा शहर, महिलाओं ने कमाए 20 हजार रूपए
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  महिलाओं की आत्मनिर्भरता की कहानी   दुर्ग (रोहितास सिंह भुवाल)। दुर्ग जिले के ग्राम पंचायत बोरीगारका की महिलाएं अपने घरेलू कार्यों के साथ आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। बस्तर सरस मेला में महिलाओं ने 20 हजार रूपए की मोमबत्तियों का विक्रय कर अपनी मेहनत और सफलता का परिचय दिया। पुष्पा साहू, जो सिद्धी स्व सहायता समूह से जुड़ी हैं, ने गांव की अन्य महिलाओं के साथ बिहान योजना के अंतर्गत काम करना शुरू किया। उन्होंने प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर योजना के तहत बैंक से ऋण लेकर अचार, पापड़, मोमबत्ती, दीया, और केक बनाने का प्रशिक्षण लिया और महिलाओं के साथ मिलकर व्यवसाय प्रारंभ किया। आज ये महिलाएं साल भर में 1 से 2 लाख रूपए तक की आमदनी प्राप्त कर रही हैं, जिसे वे अपने बच्चों की पढ़ाई में खर्च कर रही हैं। पुष्पा साहू ने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए एक स्कूटी खरीदी है, जिसके माध्यम से वे अपने उत्पाद गांव-गांव पहुंचा रही हैं। उन्होंने अपने बेटे का दाखिला बिलासपुर में पीएससी कोचिंग के लिए कराया है। दीवाली के लिए विशेष रूप से मोमबत्तियां, दीये और सजावटी सामान बनाकर महिलाएं गांव से शहर तक अपनी पहचान बना रही हैं। पुष्पा साहू स्वयं प्रशिक्षण लेकर राजनांदगांव, रायपुर, बेमेतरा जैसे जिलों की महिलाओं को भी प्रशिक्षित कर रही हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे रही हैं। उन्होंने बताया कि समूह का गठन 22 मई 2015 को किया गया था, जिसमें कुल 11 सदस्य हैं। समूह ने बैंक से लोन लेकर अचार बनाने का काम शुरू किया था, जिससे अच्छी आमदनी होने लगी। इसके बाद समूह की महिलाओं ने मोमबत्ती बनाने का प्रशिक्षण लिया, जिससे मुनाफा और बढ़ा। पुष्पा साहू ने बताया कि अब मोमबत्तियों की इतनी मांग है कि वे दूसरे जिलों जैसे रायपुर, बालोद, कवर्धा, बस्तर, और जगदलपुर तक पहुंच रही हैं। इस व्यवसाय से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आया है। उनकी इस सफलता को देखते हुए उन्हें जिला पंचायत परिसर में 26 और 27 अक्टूबर को लगने वाले बिहान बाजार में स्टॉल लगाने का मौका दिया गया है। सिद्धी स्व सहायता समूह की महिलाएं अब मोमबत्तियों और अचार के अलावा बड़ी, पापड़ और केक भी बना रही हैं। इसके अलावा पंचायत द्वारा उन्हें मछली पालन के लिए 10 साल के लिए तालाब भी लीज पर दिया गया है।
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