बांग्लादेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर भारत सरकार से कड़ा कदम उठाने की मांग
दुर्ग (रोहितास सिंह भुवाल।
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बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार, मंदिरों पर हमले और हत्याओं के विरोध में राष्ट्रीय बजरंग दल ने दुर्ग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में भारत सरकार से बांग्लादेश में जारी हिंसा के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने और हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

ज्ञापन में कहा गया है कि बांग्लादेश में चल रहे उग्र आंदोलन के कारण वहां की कानून व्यवस्था पूरी तरह से विफल हो गई है। भारत-विरोधी और हिंदू-विरोधी तत्व, जिनमें जमाते इस्लाम जैसी कट्टरपंथी संगठनों की प्रमुख भूमिका है, जानबूझकर हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं। हिंदुओं के घरों को लूटा जा रहा है, मंदिरों को तोड़ा जा रहा है, मूर्तियों को अपवित्र किया जा रहा है, और हिंसा की आड़ में हिंदुओं की हत्याएं हो रही हैं।
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राष्ट्रीय बजरंग दल ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि वह बांग्लादेश की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए वहां के हिंदुओं की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाएं। ज्ञापन में मांग की गई है कि भारत सरकार बांग्लादेश की सेना के प्रमुख से सीधी बातचीत करे और उन्हें हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बाध्य करे। बजरंग दल ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति पर जल्द ही काबू नहीं पाया गया, तो भारत सरकार को बांग्लादेश के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी होगी।
राष्ट्रीय बजरंग दल के नेताओं ने भारत सरकार द्वारा बांग्लादेश में हो रहे अत्याचारों पर उठाए जा रहे कदमों का स्वागत करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की है। ज्ञापन में कहा गया है कि पहले भी ऐसी घटनाओं पर भारत सरकार ने हस्तक्षेप किया था और बांग्लादेश की सेना को हिंदुओं की रक्षा के लिए कदम उठाने के लिए बाध्य किया था। इसी तरह की कार्रवाई अब भी जरूरी है।
ज्ञापन सौंपने वालों में वेणु माधव राव, मुकेश सोनकर, राहुल लाहुलकर, दिनेश साहू, संतोष विश्वकर्मा, भागवत तिवारी, संकेत चंद्राकर, संजय यादव और अक्षय सक्सेना शामिल थे। इन नेताओं ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि यदि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार नहीं रुका, तो इससे दोनों देशों के बीच संबंधों पर गंभीर असर पड़ेगा।
ज्ञापन के माध्यम से बजरंग दल ने बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की और चेतावनी दी कि यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।