22 अक्टूबर 2026 |
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25 साल जंगल और संघर्ष में बिताने वाली मीना ने जवानों को बनाया भाई, मुख्यधारा में लौटने का दिया संदेश

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OM Darpan

Aug 30, 2026 04:41 am 1,280 views
25 साल जंगल और संघर्ष में बिताने वाली मीना ने जवानों को बनाया भाई, मुख्यधारा में लौटने का दिया संदेश
  ✍️ विशेष संवाददाता भानुप्रतापपुर (कांकेर) | कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर स्थित सुरक्षा बल कैंप में एक भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया, जो बस्तर के बदलते सामाजिक ताने-बाने की नई कहानी बयां कर रहा है। करीब 25 वर्षों तक नक्सली संगठन और जंगल के संघर्ष में जीवन बिताने वाली मीना और अन्य पूर्व नक्सली महिलाओं ने इस बार सुरक्षा बलों के जवानों की कलाई पर राखी बांधी। जिस वर्दी को कभी ये महिलाएं अविश्वास और टकराव की नजर से देखती थीं, आज उसी वर्दी के साथ भाई-बहन का अटूट रिश्ता कायम हुआ। जवानों ने भी इस रिश्ते को सहर्ष स्वीकार करते हुए बहनों को शगुन दिया और मिठाई खिलाकर सुरक्षा का वचन दिया।

बंदूक का साया हटा और दिलों में बढ़ा विश्वास

यह आयोजन केवल एक पारंपरिक त्योहार तक सीमित नहीं था, बल्कि दशकों के हिंसक संघर्ष से उपजी खाई को पाटने की एक गंभीर कोशिश थी। बस्तर में लंबे समय तक सुरक्षा बल और नक्सली आमने-सामने रहे हैं, लेकिन रक्षाबंधन के इस कार्यक्रम ने संवाद और विश्वास के लिए एक नई जगह बनाई है। जंगल की चुनौतीपूर्ण जिंदगी में हथियार उठाने वाली मीना और उनके साथ आईं अन्य महिलाओं के लिए यह पल जीवन में बड़े बदलाव का प्रतीक था। उनके हाथों में अब हथियार नहीं, बल्कि विश्वास का धागा था। इस कार्यक्रम में महिला पुलिसकर्मियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे माहौल पूरी तरह पारिवारिक नजर आया।

निखिल राखेचा ने बताया शांति की दिशा में बड़ा कदम

कांकेर एसपी निखिल राखेचा ने इस पहल को नक्सल समस्या के स्थाई समाधान की दिशा में एक प्रभावी प्रयास करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के प्रयासों का मुख्य उद्देश्य समाज में विश्वास बहाली को मजबूत करना और मुख्यधारा से भटक चुके लोगों को वापस जोड़ने की प्रक्रिया में तेजी लाना है। निखिल राखेचा के अनुसार, रक्षाबंधन का यह पवित्र धागा रिश्तों को सामान्य बनाने में मदद करेगा। यह आयोजन संदेश देता है कि यदि हिंसा का मार्ग त्यागकर मुख्यधारा में लौटने वालों को समाज स्वीकार करे, तो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अमन का रास्ता और अधिक सुगम हो सकता है।

शांति और विकास की ओर बढ़ता नया बस्तर

बस्तर की पहचान लंबे समय तक केवल मुठभेड़ों और बारूदी सुरंगों के इर्द-गिर्द सिमटी रही, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार 'नक्सल मुक्त बस्तर' के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। शासन की ओर से चलाई जा रही विकास योजनाओं, नई सड़कों, स्कूलों और स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ सामाजिक मेलजोल के ऐसे कार्यक्रमों ने शांति की उम्मीद जगाई है। भानुप्रतापपुर कैंप की यह घटना साबित करती है कि स्थायी शांति का मार्ग केवल संघर्ष से नहीं, बल्कि आपसी भरोसे और मुख्यधारा में सम्मानजनक वापसी से ही प्रशस्त होगा।  

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