देश में कोयला उत्पादन 210 मिलियन टन पहुंचा, 10 साल में 7 गुना उछाल
OM Darpan
नई दिल्ली। देश में वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी प्रक्रिया से खनन क्षेत्र में बड़े बदलाव आए हैं। 18 जून 2020 को शुरू हुई इस व्यवस्था के तहत अब तक 147 कोयला खदानों की नीलामी पूरी हो चुकी है। इसमें 44 नई कंपनियों ने खदानें हासिल की हैं।
कोयला उत्पादन के आंकड़ों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। कैप्टिव और वाणिज्यिक ब्लॉकों से वित्त वर्ष 2025-26 में कुल उत्पादन 210 मिलियन टन तक पहुंच गया। एक दशक पहले यह आंकड़ा महज 28.8 मिलियन टन था। इस दौरान 22 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई।
नीलामी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए एमएसटीसी प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है। इसमें 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति दी गई है और अंतिम उपयोग पर कोई प्रतिबंध नहीं रखा गया है। अग्रिम भुगतान को भी कम रखा गया है ताकि नए खिलाड़ी इसमें शामिल हो सकें।
सरकारी कंपनियों ने भी लगाई बोली
नई नीति ने न केवल निजी क्षेत्र को आकर्षित किया है, बल्कि सरकारी कंपनियों को भी प्रतिस्पर्धी बनाया है। कोल इंडिया की सहायक कंपनियां वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) और नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) अब निजी खिलाड़ियों के समान शर्तों पर निविदाओं में हिस्सा ले रही हैं।
47,500 करोड़ का सालाना राजस्व
नीलाम किए गए 147 ब्लॉकों से राज्यों को रॉयल्टी, जीएसटी और डीएमएफ के रूप में बड़ा हिस्सा मिलेगा। इससे लगभग 47,500 करोड़ रुपए का वार्षिक राजस्व और 55,000 करोड़ रुपए का पूंजी निवेश आने का अनुमान है। साथ ही 4.9 लाख रोजगार के अवसर सृजित होंगे। वित्त वर्ष 2025-26 में आवंटित खदानों से लगभग 3090 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ।
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