22 अक्टूबर 2026 |
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

'अब हम बस्तर नहीं छोड़ना चाहते...' सीएम साय से मिले पद्मश्री गोडबोले दंपति, मुख्यमंत्री ने 40 साल की सेवा को सराहा

शेयर करें

OM Darpan

May 30, 2026 02:44 pm 404 views
'अब हम बस्तर नहीं छोड़ना चाहते...' सीएम साय से मिले पद्मश्री गोडबोले दंपति, मुख्यमंत्री ने 40 साल की सेवा को सराहा
  • बस्तर के बीहड़ों में 4 दशकों से दे रहे निःशुल्क चिकित्सा और शिक्षा

  • नक्सलवाद के खौफ में भी नहीं छोड़ा जनजातीय समाज का साथ

  • मुख्यमंत्री ने कहा- यह सम्मान पूरे छत्तीसगढ़ और बस्तरवासियों का गौरव है

  • सुरक्षा कैंप अब बन रहे 'सेवा डेरा', सीएम ने दी 'नियद नेल्ला नार' योजना की जानकारी

रायपुर। पद्मश्री गोडबोले दंपति से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने निवास कार्यालय में मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बस्तर और जनजातीय समाज के बीच 40 साल से अधिक समय से किए जा रहे उनके सेवा कार्यों की सराहना की। पद्मश्री से सम्मानित समाजसेवी डॉ. सुनीता और डॉ. रामचंद्र गोडबोले दंपति ने मुख्यमंत्री से अपने आत्मीय जुड़ाव का जिक्र करते हुए कहा, “बस्तर और बस्तरवासियों से हमें गहरा प्रेम है। हम गोंडी और हल्बी में उनसे संवाद करते हैं। यही हमारी संस्कृति है और अब हम बस्तर नहीं छोड़ना चाहते हैं।” मुख्यमंत्री ने इसे मानवीय आत्मीयता और सामाजिक प्रतिबद्धता की दुर्लभ मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि गोडबोले दंपति का सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और बस्तरवासियों का गौरव है।

पद्मश्री गोडबोले दंपति की सेवा को सीएम ने सराहा

मुख्यमंत्री साय ने गोडबोले दंपति को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनका सम्मान पूरे प्रदेश और जनजातीय समाज का सम्मान है। चार दशकों तक अबूझमाड़ जैसे दुर्गम और घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहकर गोडबोले दंपति ने मरीजों को निःशुल्क उपचार दिया है। इन्होंने कुपोषण, टीबी, मलेरिया और पीलिया जैसी गंभीर बीमारियों के खिलाफ जागरूकता फैलाई। इसके साथ ही शिक्षा और नशामुक्ति के क्षेत्र में भी लगातार काम किया।

नक्सलवाद के खौफ में भी नहीं छोड़ा साथ

मुख्यमंत्री ने कहा कि भय के माहौल में भी बस्तर के प्रति गोडबोले दंपति का विश्वास कमजोर नहीं हुआ। वे केवल चिकित्सक नहीं, बल्कि समाज के आत्मीय सहयोगी बन गए हैं। बस्तर के बीहड़ों में चार दशकों से जारी यह सेवा मानवता और समर्पण का असाधारण उदाहरण है। जनजातीय समाज के बीच रहकर गोडबोले दंपति ने सेवा को जीवन का उद्देश्य बना लिया है।

स्थानीय संस्कृति में रचे-बसे गोडबोले दंपति

मुख्यमंत्री साय ने खुशी जताते हुए कहा कि गोडबोले दंपति केवल बस्तर में काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली में पूरी तरह रच-बस गए हैं। गोंडी और हल्बी जैसी स्थानीय भाषाओं में बातचीत करना उनके अपनत्व को दर्शाता है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वनवासी कल्याण आश्रम से अपने स्वयं के जुड़ाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आश्रम के संस्कार सेवा भावना को मजबूत करते हैं। चर्चा के दौरान गोडबोले दंपति ने संत गहिरा गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की। उन्होंने कैलाश गुफा, संस्कृत विद्यालय और सरगुजा अंचल की अपनी यात्राओं के अनुभव भी साझा किए।

सुरक्षा कैंपों को सेवा डेरा बना रही सरकार

मुख्यमंत्री ने गोडबोले दंपति के साथ बस्तर के विकास के लिए सरकार की कार्ययोजना भी साझा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार बस्तर में विकास और विश्वास की नीति पर काम कर रही है। सीएम साय ने कहा कि सरकार सुरक्षा कैंपों को केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रख रही है। इन्हें “सेवा डेरा” के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा। इसके अलावा 'नियद नेल्ला नार' योजना के जरिए दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक शासन की पहुंच बढ़ाई जा रही है। इससे बस्तर में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।
Tags

शेयर करें

विज्ञापन / Advertisement

Government Advertisement
261022143149539

विज्ञापन

Advertisement